भारत के वो 10 महल जो होटल में परिवर्तित हो गए

भारत के वो 10 महल जो होटल में परिवर्तित हो गए

भारत के शीर्ष 10 महल, जो होटल में परिवर्तित हो गए

  • रामबाग पैलेस
  • लेक पैलेस
  • उम्मेद भवन पैलेस
  • देवीगढ़ पैलेस
  • गजनेर पैलेस
  • नीमराना किला
  • किला चनवा
  • अहिल्या किला
  • झालमांड गढ़
  • अजीत भवन

10रामबाग पैलेस:-

शहर:- जयपुर

 

रामबाग पैलेस जयपुर में स्थित एक महल था जिसे 1835 में राजकुमार राम सिंह द्वितीय द्वारा निर्मित करवाया गया था. 1835 में, इस महल के पहले कक्ष कुमार राम सिंह 2 के लिए “गार्डन हाउस” का निर्माण करवाया गया था. कुछ समय बाद, महाराजा सवाई माधोसिंह ने इस महल में एक बड़ा “शाही शिकार कक्ष” बनवाया था.महाराजा सवाई राम सिंह द्वितीय के शासनकाल के बाद महल नवीनीकरण के बाद हवेली का नाम बदलकर रामबाग कर दिया गया था।  1910 में, राजकुमार सवाई मान सिंह द्वितीय को महल में लाया गया. उन्होंने इंग्लैंड से अपनी पढ़ाई खत्म करने के बाद रामबाग को अपना आधिकारिक निवास बनाने का निर्णय लिया था। इंग्लैंड से वापस आने के बाद, उन्होंने राजस्थानी और मुग़ल वास्तुकला से प्रेरित होकर रामबाग को शानदार महल में परिवर्तित करने का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया.

1925 में, रामबाग पैलेस जयपुर के महाराजा का स्थायी निवास के रूप में बन गया. स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 1957 में, महल को एक होटल के रूप में परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया क्योकि महल के रखरखाव का खर्चा बहुत मंहगा था. इसके बाद रामबाग पैलेस को एक लग्जरी होटल के रूप में परिवर्तित कर दिया गया. इस होटल में आगुन्तको को कई प्रकार की लग्जरी सुविधाए प्रदान की करवायी जाती है. इस प्रतिष्ठित महल को “जयपुर का गहना” के रूप में भी जाना जाता है.

9लेक पैलेस:-

शहर:- उदयपुर

 

लेक पैलेस उदयपुर की पिछोला झील के बीच जग निवास द्वीप पर स्थित है। 1743 में, महाराणा जगत सिंह ने लेक पैलेस का निर्माण करवाया था. लेक पैलेस दुनिया के सबसे उतम महलों की सूची में शामिल है. उदयपुर में विराजमान ताज लेक पैलेस मेवाड़ के शाही राजवंश का एक पूर्व ग्रीष्मकालीन महल था. 1963 में, महाराजा भागवत सिंह ने जग निवास को उदयपुर के पहले लक्ज़री होटल में बदल दिया और 1971 में अपने प्रबंधन को ताज ग्रुप ऑफ़ होटल्स, रिसॉर्ट्स, और पैलेस में स्थानांतरित कर दिया।

यह पैलेस आंगनों में स्तंभों, फव्वारों और खुबसूरत उद्यानों से सुसज्जित है. साथ ही, इस पैलेस में बहुरूपदर्शक भित्तिचित्रों, विदेशी कलाकृतियों, उत्तम फर्नीचर, जटिल सजावट, सफेद पत्थर से बनी दीवारें आगुन्तको के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र है. ताज पैलेस से चारो ओर अरावली पहाडियों का सुंदर दृश्य बहुत ही मनोबल लगता है. यहा आप शाही विलासिता, उल्लेखनीय सेवाओं और कई आधुनिक सेवाओ का आनंद ले सकते है. ताज पैलेस विलक्षण संस्कृति की उल्लेखनीय विनम्रता  के साथ अपनी समर्धि को बनाये हुए है.

8उम्मेद भवन पैलेस:-

शहर:-जोधपुर

1943 में, जोधपुर में स्थित उम्मेद भवन पैलेस का निर्माण महाराजा उम्मेद सिंह ने करवाया था. इस महल का नाम भी महाराजा उम्मेद सिंह पर ही रखा गया है. इस महल को पहले चित्तर पैलेस के नाम से भी पहले जाना जाता था. 1929 और 1949 के बीच, उम्मेद भवन का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ था.. 1949 में, यह महल जोधपुर के महाराजा का शाही निवास बन गया था. वर्तमान में, इस महल का एक खंड जोधपुर के शाही परिवार का निवास स्थान है. 1972 में, इस भव्य महल को लग्जरी होटल के रूप में परिवर्तित कर दिया गया.  संगमरमर और बालू पत्‍थर से बने इस महल का दृश्‍य पर्यटकों को आकर्षित करता है।

महल के संग्रहालय में पुरातन युग की घड़ियाँ व्यक्तिगत संग्रह से हथियार, एंटीक फर्नीचर और चित्रकारी आज भी निजी संग्रहालय में संरक्षित हैं। उम्मेद भवन महल में 347 कमरे हैं, जो राजस्थानी वास्तुकला से सुसज्जित है। 1978 में, इस महल को आईटीसी होटल्स द्वारा प्रबंधित किया गया था। बाद में 2005 में, इस महल के प्रबंधन की जिम्मेदारी ताज ग्रुप ऑफ होटल्स और रिसॉर्ट्स ने अपने हाथो में ले ली।

7देवीगढ़ पैलेस:-

शहर:- उदयपुर

झीलों की नगरी उदयपुर में स्थित देवीगढ़ पैलेस भारत के सबसे बेहतरीन महलों में से एक है. राजा सज्जन सिंह महाराणा प्रताप को 1576 में हल्दीघाटी के प्रसिद्ध युद्ध में मुगल सम्राट अकबर के खिलाफ महाराणा प्रताप के प्रति उनकी वफादारी और बहादुरी की मान्यता के रूप में देलवाड़ा रियासत से सम्मानित किया गया था। वह महाराणा प्रताप के बेहतरीन प्रतिनिधियों में से एक थे. 18 से 20 वीं शताब्दी तक, इस महल का देलवाड़ा के शासकों का शाही निवास के रूप में सेवा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

उसके बाद, यह कुछ सालो तक यह खंडहर था. 750 लोगों की एक टीम ने मिलकर इस महल का जीर्णोद्धार कार्य शुरू किया था। इस महल के पुनर्निर्माण में 15 साल का समय लगा. उसके बाद, इसे एक लग्जरी होटल के रूप में बदल दिया गया. इस महल को अर्द्ध कीमती पत्थरों से निर्मित किया गया है जो बहुत ही आकर्षक लगता है. महल में कई चीज़े राजस्थानी वास्तुकला से निर्मित है जो महल के कमरों के सुसज्जित है. इसके अलावा, आप कई आधुनिक सुविधाओ का आनंद आप महल में ले सकते है.

6गजनेर पैलेस:-

शहर:- बीकानेर

गजनेर पैलेस बीकानेर के दक्षिण-पश्चिम में बसा हुआ है। लाल पत्थरों से बना हुआ यह पैलेस गजनेर झील के किनारे पर विराजमान है. इस पैलेस का निर्माण 20 वीं शताब्दी के शुरुआती दशकों में बीकानेर के महाराजा सर गंगा सिंह द्वारा करवाया गया था. पूर्व के महाराजा राज के दिनों में ब्रिटिश गणमान्य लोगों के लिए शिकारगाह के रूप में इस महल का इस्तेमाल करते थे. महाराजा गंगा सिंह ने अपने शासनकाल के दौरान भव्य शूटिंग और भव्य मनोरंजन की अनुमति इस महल में करने के लिए दे दी थी. यहाँ आप ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन, प्राचीन मंदिर और सदियों पुराने बरगद के पेड़ों के अवशेष देख सकते हैं। गजनेर पैलेस बीकानेर की प्रसिद्ध और खुबसूरत स्थलों में से एक है.

5नीमराना किला:-

शहर: नीमराना

राजस्थान के अलवर जिले में स्थित नीमराना किला एक ऐतिहासिक किला है. इस किले का निर्माण 14वी शताब्दी में हुआ था. नीमराना चौहान वंश के महाराजा पृथ्वीराज चौहान तृतीय के वंशजों की तीसरी राजधानी थी. यह किला राजस्थान की भव्य व प्राकृतिक सुंदरता की खोज के लिए एक आदर्श आधारस्थल है। इस किले का नाम नीमराना “निमोला” के स्थानीय शासक के नाम पर पड़ा. 1192 में, पृथ्वीराज चौहान की मुहम्मद गौरी के साथ जंग में मौत हो गई थी। उसके बाद, चौहान वंश के राजा राजदेव ने नीमराना चुना लेकिन यहां का निर्माता निमोला बहादुर शासक था। इस महल को पृथ्वीराज चौहान के वंशजों ने अपनी राजधानी के रूप में चुना था.

1947 में, किले का अग्र भाग टूट गया, इस महल के शासक राजा राजिंदर सिंह को जगह से नीचे जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। राजा राजिंदर सिंह ने चालीस वर्षों तक इस संपत्ति को बेचने की कोशिश की लेकिन सभी प्रयास बेकार गए. उसके बाद, नीमराना होटल्स नामक कंपनी ने इसे ख़रीदा और उसे एक लग्जरी होटल के रूप में बदल दिया, यह कंपनी वर्तमान में भी किले का प्रबंधन कर रही है। इस किले के होटल में बहुत सारे कमरे बनवाये गए है जो पुराने शाही शैली में बनवाये गए. महल के के कमरों में फर्नीचर, पेंटिंग्स में पुराने ज़माने की वास्तु और भारत व इंग्लैंड की शैली का मिश्रण देखने को मिलता है। इसके  अलावा, महल में कई प्रकार की सुविधाए मुहया करवायी जाती है.

4किला चनवा:-

शहर: जोधपुर

1894 में, कुशल राजनीतिज्ञ और बुद्धिमान प्रशासक कविराज मुरारिदानजी ने अपने जागीर के रूप में चनवा गाँव जिले को प्राप्त किया जहाँ उन्होंने एक छोटी-सी सुरक्षित हवेली का निर्माण किया। वह जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह II के प्रमुख सिविल सेवकों में से एक थे. मुरारीदानजी के पास अपने उत्तराधिकारी का अभाव था. 1941 में, वह “खालसा” नामक कानून के शिकार हुए. कविराज मुरारिदानजी की मृत्यु के बाद  1948 में महाराजा उम्मेद सिंह के सबसे छोटे बेटे महाराजा दलीप सिंह को जगीर में चनवा गाँव दिया गया, लेकिन उन्होंने हवेली पर ध्यान नही दिया और किला सालों तक उपेक्षित रहा और सड़ने लगा।

फिर 1992 में, उन्होंने इस किले को यात्रियों और पर्यटकों के लिए एक शानदार और आकर्षक होटल के रूप में बदलने का निर्णय लिया. तब से, इस किले के शान में चार चाँद लग गये है और यह कई आगुन्तको को अपनी भव्यता से अपनी ओर आकर्षित करता है. पूरी हवेली जोधपुर के प्रसिद्ध लाल बलुआ पत्थर से बनी हुई है. इस महल की निर्मित वास्तुकला, बड़े बगीचे और महल की चित्रकरी मन मोह लेने वाली है. इस महल का स्वामित्व महाराजा दलीप सिंह और रानी मधु देवी के पास है।

3अहिल्या किला:-

लगभग 250 वर्ष पुराना अहिल्या किला अपनी विरासत और समर्धि को लिए एक चट्टान के किनारे पर टिका हुआ है. अहिल्या किला मालवा की तत्कालीन रानी अहिल्याबाई होल्कर का निवास स्थान था। 1765 से 1796 तक, महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने इस स्थान पर शासन किया और अहिल्या वाड़ा का निर्माण किया। यह महल अहिल्या बाई होल्कर के शक्तिशाली शासक होने और अपने साम्राज्य की सुरक्षा के प्रति किये गये उपायों का वर्णन करता है. इस किले के आंगनों और बरामदों की आकृति और सुन्दरता बेजोड़ है. सदियों पुरानी इमारते, कई बागान, छिपे हुए इलाके, प्राचीन मैदान और पत्थर के रास्ते इस किले के मुख्य आकर्षण के केंद्र है.

किले के अन्दर सुन्दर निर्माण तथा नक्काशी है और यहाँ के झरोखे बहुत ही आकर्षित बने हुए है. 2000 में, इंदौर के अंतिम महाराजा और उनके के बेटे प्रिंस रिचर्ड होल्कर ने अहिल्या वाडा को एक अतिथि निवास के रूप में तब्दील कर दिया जिसे अहिल्या किले के रूप में जाना जाता है।

2झालमांड गढ़:-

शहर:- जोधपुर

मेवाड़ क्षेत्र के सिसोदिया वंश के शासकों द्वारा निर्मित झालमांड गढ़ किला, झालमांड गांव में में स्थित है, यह जोधपुर शहर से 10 किलोमीटर की दुरी पर विराजमान है. जोधपुर राज्य की जागीर झालमांड गढ़ को ठाकुर गंभीर सिंह साहिब को प्रदान की गयी ताकि वह उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करे. झालमांड गढ़ एक शाही परिवार द्वारा संचालित किया जा रहा था. वर्तमान में इसे एक लग्जरी होटल के रूप में बदल दिया गया है. अब यह जोधपुर के सबसे लोकप्रिय धरोहर होटलों में से एक है. यह गढ़ हेरिटेज होटल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का एक भाग है. यह महल अपने पुराने राजसी आकर्षण का केंद्र है। आगुन्तक यहाँ विभिन्न आधुनिक सुविधाओं और मनोरंजक गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं।

1अजीत भवन:-

शहर:  जोधपुर

अजीत भवन राजस्थान के जोधपुर जिले में स्थित है. 1927 में, अजीत भवन जोधपुर राज्य के महाराजा उम्मेद सिंह के छोटे भाई महाराजाधिराज सर अजीत सिंह के लिए निर्मित करवाया गया था. कई सालो तक यह महाराजो का शाही निवास था. बाद में, इस महल को भव्य विरासत होटल में तब्दील कर दिया गया. वर्तमान में, यह महल भारत के सबसे बेहतरीन विरासत होटलों की सूची में शुमार है. राजस्थान की भव्यता और राजपूत जीवन शेली का आनंद लेने के लिए यहाँ हर साल कई आगुन्तक आते है.

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